जनगणना की अधिसूचना जारी — बात सिर्फ गिनती की या हक की भी होगी।
भारत सरकार ने 16 जून 2025 को जनगणना 2027 के लिए अधिसूचना जारी कर दी है।
1931 के बाद पहली बार जातिगत आंकड़े भी इकट्ठे किए जाएंगे। यह सिर्फ आंकड़ों की नहीं, सामाजिक न्याय की बुनियाद है।
जनगणना दो चरणों में होगी —
पहले मकानों की गिनती, फिर जनसंख्या का सर्वेक्षण।
सारा काम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगा।
गांव-गांव मोबाइल ऐप से लोग खुद को दर्ज करेंगे, लेकिन सवाल अब भी वही है:
क्या सिस्टम वंचितों की सही गिनती करेगा?
क्या हर जाति, वर्ग, श्रेणी को समान रूप से दर्ज किया जाएगा?
क्या इसके आँकड़ों से नीति में बदलाव होगा, या फिर यह भी सियासी हिसाब-किताब का हिस्सा बन जाएगा?
34 लाख कर्मचारी, लाखों परिवार, और एक बड़ी उम्मीद — कि अब देश की तस्वीर सिर्फ अनुमान नहीं, हकीकत के आधार पर बनेगी।
पर सवाल जनता को भी पूछना होगा —
क्या आप तैयार हैं अपनी पहचान, अपनी ज़रूरत और अपनी स्थिति को ईमानदारी से दर्ज कराने के लिए?
जनगणना सिर्फ सरकार का काम नहीं, यह हर नागरिक की ज़िम्मेदारी भी है।
???? 2027 तक पूरी होगी जनगणना।
???? 1931 के बाद पहली बार होगी जातिगत जनगणना।
???? लेकिन… आंकड़े 2029 के बाद ही आएंगे!










