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भारतीय किसानों की कमर तोड़ने के लिए सरकार का एक और मास्टर स्ट्रोक… भारत अमेरिका ट्रेड समझौता…प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड भाकियू प्रधान रवि पंवार
आज प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड भारतीय किसान यूनियन प्रधान रवि पंवार जी से ट्रेड डील जो अमेरिका और भारत के बीच होने वाली है उसके बारे में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि भारत के छोटे किसानों की आजीविका पर संकट आने वाला है। जब देश का किसान हीं संकट में होगा तो आप किसी की भी खुशी की परिकल्पना कैसे कर सकते है, क्योंकि हमारा देश तो कृषि प्रधान देश है।
इस ट्रेड समझौते से देश के किसानों के सामने बहुत बड़ा संकट आने वाला है,क्योंकि अमेरिका में सरकारों की सब्सिडी किसानों को बहुत ज्यादा है, जबकि भारत में तो बुरा हाल है सरकार ने तो MSP तक बहुत सारी फसलों पर किसानों को नहीं दिया है, जिससे कि सस्ते अमेरिकी कृषि उत्पादों से भारतीय बाजारों में आने से,देश के खासकर छोटे किसानों को अपने उत्पाद लागत से भी कम मूल्य पर बेचने मजबूर होना पड़ सकता हैं, जिससे छोटे किसानों की आजीविका पर बहुत बड़ी विपत्ति उत्पन्न होगी। मेरा यह मानना है कि भारतीय सरकार को कृषि संबंधी किसी भी समझौते को किसी भी देश के साथ साइन करने से पहले देश के छोटे किसानों की स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए देव उनके विचार लेकर ही किसी भी समझौते को किया जाए ताकि उनकी आजीविकाओं पर उनके बच्चों पर कोई संकट ना आए।
पर सरकारों की उदासीनता की वजह से छोटे किसान कर्ज के जाल में इस कदर फंसे हुए हैं, की कई प्रदेश में किसानों को कर्ज ना चुका पाने की वजह से आत्महत्या तक करनी पड़ रही है।
जहां एक तरफ देश का पूंजीपति कितना भी कर्ज लेकर देश से बाहर भाग जाता है। वही किसानों को कर्ज न चुका पाने की वजह से इतनी शर्मिंदगी और बदनामी झेलनी पड़ती है कि उसे आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ता है।
भारत की सरकार से मेरा निवेदन है कि किसानों के लिए जो योजनाएं केंद्र सरकार बनती है उनको और सरल किए जाने की जरूरत है, तथा वह बिना किसी बिचौलिए के सीधे किसान को मिले ऐसा सुनिश्चित करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।तो ही देश के छोटे किसान का भला हो सकता है।
और देश के किसानों के हित में किसी भी कृषि समझौते को किसी भी विकसित देश के साथ करने से पहले देश के किसानों की राय लेना बहुत जरूरी है, क्योंकि कृषि आधारित योजनाएं एसी कमरों के अंदर ना बनाकर धरातल पर किसानों की बीच बैठकर बनाई जाय तो शायद देश के अन्नदाता का भला हो सके।








