विख्यात धर्म गुरु स्वामी दर्शन भारती जी एवं प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड भाकियू प्रधान रवि पंवार ने हरिद्वार में आयोजित विख्यात हैंड टू हैंड फाइटिंग स्पोर्ट् फेडरेशन कप का किया उद्घाटन

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लाइव देवभूमि भारत संवादाता हरिद्वार 

हैंड टू हैंड फाइटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वार आयोजित फेडरेशन कप हरिद्वार में हो रहा है।

इसका उद्घाटन करते हुए स्वामी दर्शन भारती जी ने  बताया कि

जहां हाथों से हाथ की लड़ाई (Hand-to-Hand Combat) के खेल और शैलियों में मिश्रित मार्शल आर्ट (MMA), क्राव मागा, कुश्ती, जुडो, कराटे, बॉक्सिंग, कबड्डी और भारतीय पारंपरिक खेल (जैसे अखाड़ा) शामिल हैं, जो ताकत, तकनीक और रणनीति का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें MMA कई विधाओं (जैसे कुश्ती, जूडो, तायक्वोंडो, मय थाई) का मिश्रण है और क्राव मागा एक सैन्य आत्मरक्षा प्रणाली है, जबकि भारत में कबड्डी और अखाड़ा जैसे स्वदेशी खेल भी लोकप्रिय हैं।

प्रमुख हाथ से हाथ की लड़ाई (Hand-to-Hand Combat) की शैलियाँ और खेल:

मिश्रित मार्शल आर्ट (MMA) (Mixed Martial Arts): यह कई शैलियों (बॉक्सिंग, जूडो, कुश्ती, मय थाई, तायक्वोंडो) की तकनीकों का मिश्रण है, जो आपको हर स्थिति के लिए तैयार करता है।

क्राव मागा (Krav Maga): यह इजरायली सैन्य आत्मरक्षा प्रणाली है, जो प्रभावी और सीधी तकनीकों पर केंद्रित है, जिसका उपयोग सेना भी करती है।

कुश्ती (Wrestling): इसमें प्रतिद्वंद्वी को पकड़ना, पटकना और नियंत्रण करना शामिल है, जो भारतीय अखाड़ों में भी प्रचलित है।

जुडो (Judo): इसमें प्रतिद्वंद्वी को फेंकने (throws) और जमीन पर नियंत्रण (grappling) करने पर जोर दिया जाता है, और यह एक ओलंपिक खेल भी है।

 

 

 

 

कराटे (Karate): यह हाथ, पैर, कोहनी और घुटनों का उपयोग करके जोरदार वार (strikes) करने पर केंद्रित है।

बॉक्सिंग (Boxing): मुख्य रूप से मुक्कों (punches) पर आधारित एक खेल, जो हाथ की गति और शक्ति के लिए महत्वपूर्ण है।

कबड्डी (Kabaddi): भारत का एक पारंपरिक खेल जिसमें कौशल, शारीरिक शक्ति और सांस लेने की क्षमता का परीक्षण होता है, जिसमें पकड़ने और भागने की तकनीकें शामिल होती हैं।

भारतीय संदर्भ में:

अखाड़ा (Akhara): भारत की पारंपरिक कुश्ती शैली, जहां पहलवान हार न मानने तक लड़ते हैं।

मलखंब (Mallakhamb): यह योग, व्यायाम और मार्शल आर्ट को जोड़ता है, जिसमें पोल (खंभे) का उपयोग होता है, जो शरीर को मजबूत बनाता है।

 

सेनाएं अक्सर अपने जवानों को हाथ से हाथ की लड़ाई (Hand-to-Hand Combat) का प्रशिक्षण देती हैं,

संक्षेप में, हाथ से हाथ की लड़ाई के खेल और शैलियाँ अलग-अलग संस्कृतियों और जरूरतों के हिसाब से विकसित हुई हैं, लेकिन सभी का लक्ष्य शारीरिक और मानसिक रूप से खुद को बचाने या प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार करना है।

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